7वें वेतनमान वेतन निर्धारण (Pay Fixation) कैलकुलेटर
राजस्थान 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) में वेतन निर्धारण के नियम
राजस्थान सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2017 के तहत राज्य कर्मचारियों का वेतन निर्धारण 7वें वेतन आयोग की पे-मैट्रिक्स के आधार पर किया जाता है। शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के लिए करियर के विभिन्न पड़ावों पर वेतन निर्धारण (Pay Fixation) के अलग-अलग नियम लागू होते हैं।
1. प्रोबेशन काल के बाद स्थिरीकरण (Fixation Rules):
राजस्थान में नवनियुक्त कर्मचारियों को दो वर्ष की अवधि तक 'परिवीक्षाधीन संकाय' (Probationer Trainee) के रूप में कार्य करना होता है। इस दौरान उन्हें केवल एक निश्चित पारिश्रमिक (Fixed Consolidated Pay) मिलता है, जिसमें से जीपीएफ-2004 या आरजीएचएस कटौती को छोड़कर कोई भत्ता (जैसे DA, HRA) देय नहीं होता है।
दो वर्ष की संतोषजनक सेवा पूर्ण होने के बाद, कर्मचारी को उनके संबंधित पे-लेवल (जैसे ग्रेड-3 शिक्षक के लिए L-10) के प्रथम सेल (न्यूनतम बेसिक पे) पर स्थिर (Fix) किया जाता है। इसके बाद उन्हें नियमित मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता (DA) और मकान किराया भत्ता (HRA) मिलना प्रारंभ हो जाता है।
2. वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment - 3%):
स्थिरीकरण के बाद कर्मचारी को प्रतिवर्ष 1 जुलाई या 1 जनवरी (अर्हता नियमों के अनुसार) को एक वेतन वृद्धि (Annual Increment) दी जाती है। यह वेतन वृद्धि वर्तमान मूल वेतन के लगभग 3% के बराबर होती है, जिसे पे-मैट्रिक्स के उसी लेवल में अगले ऊर्ध्वाधर सेल (Next Vertical Cell) में समायोजित किया जाता है।
3. प्रमोशन एवं सुनिश्चित करियर प्रगति (MACP / ACP):
जब किसी शिक्षक का प्रमोशन होता है या 9, 18, 27 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर सुनिश्चित करियर प्रगति (ACP/MACP) मिलती है, तो उनका वेतन निर्धारण किया जाता है:
- काल्पनिक वेतन वृद्धि (Notional Increment): सर्वप्रथम कर्मचारी के वर्तमान लेवल में एक काल्पनिक वेतन वृद्धि दी जाती है (अगले सेल का वेतन)।
- उच्चतर लेवल में फिटमेंट: इसके बाद, उस बढ़ी हुई राशि को उच्चतर पे-लेवल में खोजा जाता है। यदि वह राशि उच्चतर लेवल में मौजूद है, तो उसे वही बेसिक पे मिलता है; अन्यथा, उच्चतर लेवल में उससे ठीक अगली बड़ी राशि (Next Higher Cell) पर वेतन नियत किया जाता है।